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Shani's Sadesati Panoti (Year 2025)

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Shani (Saturn) is known as the lord of justice in Vedic astrology. When Shani transits into a new moon sign, it influences different moon signs in various ways, particularly through Sadesati and Small Panoti (Dhaiya). In 2025, Shani will enter Pisces (Meen Rashi) on 29 March, 2025 , and this will have a significant impact on certain moon signs. About Shani Sadesati: Shani Sadesati is a 7.5 year period when Shani transits through the 12th, 1st, and 2nd houses from the natal Moon sign. It is believed to bring major life challenges, hardships, and karmic lessons. However, for some, it can also bring opportunities, discipline, and spiritual growth depending on their individual charts. About Small Panoti (Dhaiya): Small Panoti or Dhaiya is a period of 2.5 years when Shani transits through the 4th or 8th house from the natal Moon sign. This is considered a testing period, bringing struggles and obstacles in life. Moon Signs Affected by Sadesati in 2025: Kumbh (Aquarius) will be in...

The Significance of Colors in Astrology

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Colors play a significant role in astrology, influencing emotions, energy levels, and even luck. Each color is associated with a specific planet and has unique vibrations that can impact different aspects of life. Let’s explore how different colors affect us according to astrology. 1. Red, Orange, and Mustard – The Colors of Vitality and Leadership Planet: Sun (Surya) Effects: These colors represent vitality, power, and leadership. They enhance confidence, authority, and enthusiasm. Best Uses: Wearing these colors can boost self-esteem and leadership qualities. 2. White and Soft Blues – The Colors of Serenity and Intuition Planet: Moon (Chandra)   Effects: These colors symbolize serenity, emotions, intuition, and nurturing energy. They bring mental clarity and emotional balance. Best Uses: Ideal for enhancing peace, intuition, and emotional well-being. 3. Red – The Color of Passion and Courage Planet: Mars (Mangal)   Effects: Red represents passion, action, c...

Pradosh Dates (Year 2025)

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11/01/2025 : शनि प्रदोष व्रत 27/01/2025 : सोम प्रदोष व्रत 09/02/2025 : रवि प्रदोष व्रत 25/02/2025 : भौम प्रदोष व्रत 11/03/2025 : भौम प्रदोष व्रत 27/03/2025 : गुरु प्रदोष व्रत 10/04/2025 : गुरु प्रदोष व्रत 25/04/2025 : शुक्र प्रदोष व्रत 09/05/2025 : शुक्र प्रदोष व्रत 24/05/2025 : शनि प्रदोष व्रत 08/06/2025 : रवि प्रदोष व्रत 23/06/2025 : सोम प्रदोष व्रत 08/07/2025 : भौम प्रदोष व्रत 22/07/2025 : भौम प्रदोष व्रत 06/08/2025 : बुध प्रदोष व्रत 20/08/2025 : बुध प्रदोष व्रत 05/09/2025 : शुक्र प्रदोष व्रत 19/09/2025 : शुक्र प्रदोष व्रत 04/10/2025 : शनि प्रदोष व्रत 18/10/2025 : शनि प्रदोष व्रत 03/11/2025 : सोम प्रदोष व्रत 17/11/2025 : सोम प्रदोष व्रत 02/12/2025 : भौम प्रदोष व्रत 17/12/2025 : बुध प्रदोष व्रत II ॐ नमः शिवाय II

Sankashti Chaturthi Dates (Year 2025)

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17/01/2025, शुक्रवार - लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी 16/02/2025, रविवार - द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 17/03/2025, सोमवार - भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी 16/04/2025, बुधवार - विकट संकष्टी चतुर्थी 16/05/2025, शुक्रवार - एकदन्त संकष्टी चतुर्थी 14/06/2025, शनिवार - कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी 14/07/2025, सोमवार - गजानन संकष्टी चतुर्थी 12/08/2025, मंगलवार - हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी (बहुला चतुर्थी) 10/09/2025, बुधवार - विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी 10/10/2025, शुक्रवार - वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी (करवा चौथ) 08/11/2025, शनिवार - गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 07/12/2025, रविवार - अखुरथ संकष्टी चतुर्थी

Ekadashi Dates (Year 2025)

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10/01/2025 : पुत्रदा एकादशी 25/01/2025 : षटतिला एकादशी 08/02/2025 : जया एकादशी 24/02/2025 : विजया एकादशी 10/03/2025 : आमलकी एकादशी 25/03/2025 : पापमोचिनी एकादशी 26/03/2025 : एकादशी (वैष्णव) 08/04/2025 : कामदा एकादशी 24/04/2025 : बरूथिनी एकादशी 08/05/2025 : मोहिनी एकादशी 23/05/2025 : अपरा एकादशी 06/06/2025 : निर्जला एकादशी 07/06/2025 : एकादशी (वैष्णव) 21/06/2025 : योगिनी एकादशी 22/06/2025 : एकादशी (वैष्णव) 06/07/2025 : देवशयनी एकादशी 21/07/2025 : कामिका एकादशी 05/08/2025 : पुत्रदा एकादशी 19/08/2025 : अजा एकादशी 03/09/2025 : परिवर्तिनी एकादशी 17/09/2025 : इन्दिरा एकादशी 03/10/2025 : पापांकुशा एकादशी 17/10/2025 : रमा एकादशी 01/11/2025 : देवुत्थान एकादशी 02/11/2025 : एकादशी (वैष्णव) 15/11/2025 : उत्पन्ना एकादशी 01/12/2025 : मोक्षदा एकादशी 15/12/2025 : सफला एकादशी 30/12/2025 : पुत्रदा एकादशी 31/12/2025 : एकादशी (वैष्णव)

Mahishasur Mardini Stotra

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अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥ सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥ अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते । मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥ अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते । निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥ अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते । दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥ अयि शरणागत वैरिवधुव...

Durga Saptashati : Brief summary of 13 chapters

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Durga Saptashati, also known as Chandi Path or Devi Mahatmyam, is a revered Hindu scripture found in the Markandeya Purana. Comprising 700 verses, it celebrates the victory of Goddess Durga over evil forces and symbolizes the triumph of good over evil. It is traditionally recited during Navratri, and its stories offer deep spiritual insights into the nature of the divine feminine and the power of devotion. Let’s take a brief journey through each of the thirteen chapters of the Durga Saptashati and their meanings: Chapter 1: The Story of King Suratha and Vaishya Samadhi The story begins with King Suratha, who, after losing his kingdom, wanders into a forest. There he meets a merchant, Samadhi, who has been cheated by his family. Both men, despite their suffering, remain attached to their worldly possessions and relationships. They approach Sage Medhas for guidance, who tells them the divine story of the Goddess Durga to help them understand the nature of Maya (illusion) and self-realiza...

Putrada Ekadashi Vrat Katha

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एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी गई है ।  हर मास में 2 एकादशी तिथियां पड़ती हैं ।  पुत्रदा एकादशी वर्ष में दो बार आती है। एक बार श्रावण मास में और दूसरी बार पौष मास में।  श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी और पौष मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से साधक की पुत्र प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है। पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखने वाले मनुष्य को श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से करना चाहिये। श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा: धर्म ग्रंथों के अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के विषय में पूछा तब उन्होने धर्मराज युधिष्ठिर को इस एकादशी के विषय में बताया था। भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को कहा, हे धर्मराज! श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी, पवित्रोपना एकादशी और पवित्रा एकादशी जैसे अलग अलग नामों से जाना जाता है। इस का महात्म्य इसके नाम मे ही वर्णित है। इस एकादशी का व्रत करने से पुत्र प्राप्ति की कामना प...

The Seven Types of Gurus

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In the spiritual world, a Guru is more than just a teacher. They are a guiding light, helping seekers navigate the path to enlightenment. There are seven distinct types of Gurus, each playing a unique role in our spiritual and personal development. Let's explore these seven types of Gurus and their specific contributions to our journey. 1. Suchak Guru The Suchak Guru is a master of a specific science or art. These are the experts we often refer to as "gurus" in various fields, such as a Management Guru or a Healing Master. They possess deep knowledge and expertise in their domain, providing valuable insights and guidance to those seeking to learn and excel in that particular area. 2. Vachak Guru The Vachak Guru initiates individuals into spirituality by giving a Diksha Mantra. This sacred mantra is more than just words; it has the power to transform the life of the person receiving it. By bestowing this mantra, the Vachak Guru opens the door to a deeper spiritual experien...

Nirjala Ekadashi Vrat Katha

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युधिष्ठिर ने कहा: जनार्दन ! ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी पड़ती हो, कृपया उसका वर्णन कीजिये। भगवान श्रीकृष्ण बोले : राजन् ! इसका वर्णन परम धर्मात्मा सत्यवतीनन्दन व्यासजी करेंगे, क्योंकि ये सम्पूर्ण शास्त्रों के तत्त्वज्ञ और वेद वेदांगों के पारंगत विद्वान हैं। तब वेदव्यासजी कहने लगे : दोनों ही पक्षों की एकादशियों के दिन भोजन न करे। द्वादशी के दिन स्नान आदि से पवित्र हो फूलों से भगवान केशव की पूजा करे। फिर नित्य कर्म समाप्त होने के पश्चात् पहले ब्राह्मणों को भोजन देकर अन्त में स्वयं भोजन करे। राजन् ! जननाशौच और मरणाशौच में भी एकादशी को भोजन नहीं करना चाहिए।  यह सुनकर भीमसेन बोले : परम बुद्धिमान पितामह ! मेरी उत्तम बात सुनिये। राजा युधिष्ठिर, माता कुन्ती, द्रौपदी, अर्जुन, नकुल और सहदेव ये एकादशी को कभी भोजन नहीं करते तथा मुझसे भी हमेशा यही कहते हैं कि : ‘भीमसेन ! तुम भी एकादशी को न खाया करो…’ किन्तु मैं उन लोगों से यही कहता हूँ कि मुझसे भूख नहीं सही जायेगी। भीमसेन की बात सुनकर व्यासजी ने कहा : यदि तुम्हें स्वर्गलोक की प्राप्ति अभीष्ट है और नरक को दूषित समझते हो तो दोनों पक्षों...